कोई तो करता है पत्थरों की किस्मत का फ़ैसला, किसे ठोकर लगना है और किसे भगवान होना है !!
आइये इस बात को एक कहानी से समझें – एक राज्य में एक राजा और उसका युवराज रहते थे, वहां का राज-पाठ बहुत अच्छा चल रहा था | एक दिन राजा और युवराज शाम को टेहलने निकले थे | वो दोनों रोज़ ही टहलने निकलते थे| उस दिन उन्हें बाज़ार में एक ग़रीब ब्राह्मण भीक्षा मांगता हुआ दिखा | युवराज ने उसकी हालत देखी तो उसे उस ब्राह्मण पे दया आ गई और युवराज ने ब्राह्मण को एक सोने से भरी अशर्फ़ी का थैला दे दिया | युवराज को उस ग़रीब ब्राह्मण की मदद करके बहुत अच्छा लगा | ब्राह्मण भी इतनी सारी सोने की अशर्फियाँ पा कर बहुत खुश था उसे लगा अब तो उसकी सारी तकलीफें ख़तम हो जाएगी | वो ख़ुशी-ख़ुशी अपने घर की तरफ जाने लगा, तभी रास्ते में एक लूटेरा मिला और उसने उस ब्राह्मण से वो सोने की अशर्फियाँ लूट कर ले गया |
अब वो ब्राह्मण फिर से उदास होकर वापस अपने घर गया और अगले दिन फिर उसी बाज़ार में जा कर भीक्षा मागने लगा | शाम को जब राजा और युवराज टेहलने निकले तो उस ब्राह्मण को फिरसे भीक्षा मागंते हुए देख युवराज ने उससे पूछा – कल ही तो मैंने तुम्हे इत्बी साड़ी अशर्फ़ी दी थी और आज फिर तुम भीक्षा मांग रहे हो | युवराज की बात सुन कर ब्राह्मण ने अपनी आप बीती राजा और युवराज को सुनाई | ब्राह्मण की बात सुन कर युवराज को बहुत बुरा लगा और उसने फिरसे ब्राह्मण की मदद करने की सोची और इस बार पहले से भी ज्यादा कीमती रत्न ‘एक माणिक’ उस ब्राह्मण को दे दिया | आज फिर ब्राह्मण बहुत ख़ुशी-ख़ुशी घर गया और किसी को बिना कुछ बताये अपने घर के घड़े में जिसे कोई इस्तमाल नहीं करता था उसमे छुपा कर उस माणिक को रख दिया|
उस दिन ब्राह्मण की पत्नी जो घड़ा लेकर नदी से पानी भरने जाती थी वो उसे ठोकर लगने से गिर कर टूट गया, तो ब्राह्मण की पत्नी ने वही घड़ा जिसमे माणिक रखा था उठा कर पानी भरने ले कर चली गई | अब वो बिचारी अंजान उसे क्या पता था की उसमे इतना किमती रत्न रखा हुआ है | जैसे ही ब्राह्मण की पत्नी ने पानी भरने कलिए घड़ा नदी में डाला वो माणिक नदी में बह गया | इधर घर में माणिक वाला घड़ा न पा कर ब्राह्मण परेशान था जब उसकी पत्नी पानी भर कर वापस आई और उसने ब्राह्मण से परेशानी का कारण पुछा तब उसने बताया तो उसकी पत्नी ने भी उसे घड़ा टूटने के कारण वो घड़ा ले जाने की बात बताई | अब सच जान कर दोनों बहुत उदास हुए लेकिन अब कुछ कर भी नहीं सकते थे | अगले दिन सुबह फिर से ब्राह्मण बाज़ार में भीक्षा मांगने गया, फिर शाम को राजा और युवराज ब्राह्मण को वहां देख कर अचरज में पद गए | युवराज के पूछने पर ब्राह्मण ने फिर से अपनी आप बीती बताई | युवराज को बहुत बुरा लगा लेकिन आश्चर्य भी हो रहा था की वो इस ब्राह्मण की दिल से मदद करने की कोशिश कर रहा है पर हर बार कुछ विपरीत परिस्थिति बन जा रही है |
इस बार राजा ने युवराज को समझाया की – ‘अब हमे ज्यादा बढ़-चढ़ कर और कुछ नहीं करना चाहिए इस ब्राह्मण का जब अच्छा समय आएगा तो सब कुछ अपने आप ही ठीक हो जायेगा’ | ऐसा कह कर राजा ने उस ब्राह्मण को दो पैसे दे दिए और वहां से आगे चल दिए | ब्राह्मण ने भी राजा और युवराज को प्रणाम किया और शाम ढलते हुए घर को जाने लगा | रास्ते में उसे एक मछवारे के पास एक मछली देखी जो वापस पानी में जाने के लिए तड़प रही थी | ब्राह्मण ने सोचा की – इन दो पैसों से मैं अपनी और अपने परिवार की भूख तो नहीं मिटा पाउँगा चलो इस मछली को जिंदगी ही दे देता हूँ | ऐसा सोअच कर ब्राह्मण ने मछवारे से वो मछली खरीद ली, और उसे अपने पानी से भरे कमंडल में डाल दिया, जैसे ही मछली पानी में गई उसके मुह से एक किमती रत्न कमंडल में गिरा – ये वही माणिक था जो युवराज ने ब्राह्मण को दिया था और वो नदी में बह गया था |
उस माणिक को देख कर ब्राह्मण ख़ुशी से चिल्लाने लगा – ‘मिल गया – मिल गया’ | उस वक़्त वो लूटेरा जिसने ब्राह्मण से सोने की अशर्फिया लूटी थी वहीँ से गुजर रहा था उसने ब्राह्मण को ऐसे चिल्लाते हुए देखा तो उसे लगा की ब्राह्मण उसे देख कर चिल्ला रहा है की चोर ‘मिल गया – मिल गया’ | राजा और युवराज भी वहीँ आस-पास ही थे उनके डर से उस लूटेरे ने ब्राह्मण को उससे लूटी हुई सोने की अशर्फिया वापस कर दी और माफ़ी मांगने लगा | अब तो उस ब्राह्मण की ख़ुशी का कोई ठिकाना ही नहीं था | एक ही बार में उसे दोनों किमती चीज़ें वापस मिल गई | ये सब देख कर युवराज भी बहुत खुश हुआ और उससे ब्राह्मण के लिए भी उससे अच्छा लगा | लेकिन ए सब देख कर युवराज के मन में प्रश्न आया और उसने राजा से पुछा – जब मैंने पहले उस ब्राह्मण की मदद करने केलिए किमती चीज़ें उसे दान की तब उससे ये चीज़ें घूम हो गई लकिन आज आपने उसे सिर्फ दो पैसे दान में दिए और उसकी किस्मत बदल गई | इस बात पर राजा मुस्कुराए और कहा – जब तुमने उससे इतनी कीमती चीज़ें दी तब उसने सिर्फ अपने बारे में सोचा लेकिन जब मैंने उसको दो पैसे दिए तब उसने उस मछली को बचने के बहाने ही सही किसी और के भले के बारे में सोचा, इसलिए भगवान ने उसकी मदद की और वहीँ से उसका अच्छा वक़्त शुरु हो गया |
जीवन में हमे अपने कर्मों से दूसरों का भला करने के बारे में सोचना चाहिए जब हम दूसरों के भले के बारे में सोचेंगे तो हमारे साथ भी हमेशा अच्छा ही होगा | और कहीं न कहीं हमारा अच्छा समय भी ज़रूर आएगा |

Kar Bhala To Ho Bhala | कर भला तो हो भला5 thoughts on “”
Super 👌👌
thanx
very nice
yah sach to hai, lekin aaj dusron ke baare koun sochta hai
Ham Badlenge to yug badlega, aisa koi sangthan bolta hai